Wednesday, November 27, 2019

सगोत्र विवाह क्यों निषेध

एक ही गोत्र में विवाह क्यों नहीं हो सकता
सनातन धर्म में पिता के नाम से ही उसके वंशज जाने जाते हैं और कालांतर में वे सभी एक गोत्र के रूप में वर्णित हो जाते हैं वे सभी रक्त संबंधी होते हैं सभी के अंदर एक ही कुल पुरुष का रक्त होता है इसलिए सभी एक ही गोत्र के भाई और बहन कहलाती हैं ।प्रारंभ से ही हिंदू समाज में सगोत्र विवाह निषेध माना गया है ।धार्मिक कारण तो है ही लेकिन इसका एक वैज्ञानिक पक्ष भी है कि दूध में दूध मिलाने से कोई अंतर नहीं पड़ता लेकिन दूध में थोड़ा सा भी नींबू पड़ जाए तो वह दूध दही में परिणित करके बहुसंख्यक मक्खन कणों में एकत्रित संगठित हो जाता है।
और विज्ञान भी इसकी पुष्टि करता है कि एक ही गोत्र में उत्पन्न पुरुष और स्त्री की संताने होती है वह अप्राकृतिक रूप में जन्म लेती है और उन्हें जन्म से ही कई प्रकार की बीमारियां घेर लेती है और बीमारी से ग्रसित रहते हैं। सही जातक का जन्म तभी होता है जब दो अलग-अलग गोत्र के स्त्री पुरुष हो।


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