Wednesday, November 27, 2019

ईश्वर कौन है।

ईश्वर कौन है।


मेरी मन की जिज्ञासा जोकि ईश्वर को जानने की बहुत दिनों से हो रही थी ।इसी की खोज में मैंने कुछ धार्मिक ग्रंथों से कुछ स्लोकों का अध्ययन किया जो इस तरह से हैं।

ऊं यो भूतों च भव्य च सर्व यसश्चाधितिष्ठति।
स्वर्यस्य च केवलं तस्मै जिष्ठाय ब्रह्मणे नमः ।।
                                       (अथर्ववेद 10-8-1)
भावार्थ :- जो भूत भविष्य और सब में व्यापक है ।जो दिव्य लोकौं का भी अधिष्ठाता है। उस ब्रह्म (परमेश्वर) को प्रणाम है।

ब्रह्म जो व्यापक बिरज अज अकल अनीह अभेद।
सो कि देह धरि होई नर जाहि न जानत वेद।।

तप बल रचाई प्रपंचु विधाता। तपबल विष्णु सकल जगत्राता त।।
तपबल संभु करहिं संघारा । तपबल सेषु धरहिं महिभारा।।

हरि व्यापक सर्वत्र समाना। प्रेम ते प्रगट हुहिं मैं जाना।।

इस प्रकार हमारे धर्म ग्रंथों में ईश्वर के महत्व व ईश्वर के बारे में वर्णन मिलता है

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